Thursday, April 15, 2010

आज शीशे में अपना अक्स छोड़ आये हैं
, वक़्त की शाख से कुछ लम्हें तोड़ आये हैं।

रास्ते जिन पर बिना साथ यूँ ही चलते रहे,
तेरे क़दमों की तरफ आज मोड़ आये हैं ।

आँख खुलते ही कई शख्स अजनबी से लगे ,
उनसे घबरा कर तेरे पास दौड़ आये हैं।
घूँट भरते ही वो जानेंगे खुमारी का असर ,
जाम में उनके आज दिल निचोड़ आये हैं।

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