टूटा फर्निचर
उसका पुराने तन से बहुत पुराना नाता है ,
पुराने टाइम पीस की थकी हुई चाबी ,
बिना नागे के वो हर रोज़ घुमाता है।
पुराने फ्रेम वाली धुंधली सी ऐनक ,
बार बार साफ़ करता नाक पर चढ़ाता है।
खांसता खंखारता पीली पद गयी तसवीरें ,
सीने से पोंछता धुल उडाता है ।
कई साल चलते HAIN उसके कईं कपडे,
फटने पर जगह जगह पैबंद लगता है।
घिसे टायरों वाली साईकिल ,
साफ़ करता है पर चला नहीं पता है।
नयी सोसाइटी में फिट नहीं होता,
बेटे के दोस्तों से दूर रखा जाता है ।
हाँ वो पुराने ख्याल वाला आदमी ,
जो पुराने संस्कार पुराना संसार
और पुराणी रवायतें भूल नहीं पता है।
जो किसी के समझ नहीं अत है ,
वो इंसान पिता कहलाता है।
दिखने में बिलकुल टूटे फर्निचर सा
जो फेंका भी नहीं जाता है और
सजाया भी नहीं जाता है।
शायद कभी काम अजय आग तपने के
इसलिए स्टोर रूम में पटक दिया जाता है.