.............माँ मेरे शब्दों में.............
भगवान का अध्बुध थोफा हे माँ
जिसके लिए दे देगें जादुनिया में लाने वाली हे माँ
अच्हा बुरा, सही गलत बतलाने वाली हे माँ
हमारे तोतले अधूरे शब्दों को माँ ही समझती
माँ से ही दुनिया हे बस्ती
इतने दर्द सहे कर माँ ही ने जीवन प्रधान किया
उसे शुक्रिया कहेने का भगवान ने मुझे अवसर भी न दिया
माँ के चरित्र के बारे में कुछ ना जान पाई
माँ की ममता का लुफ्स में न उठा पाई, जो माँ मुझे इस दुनिया में लाई
माँ के जीवन में मुझे भेज कर, उनकी झोली खुशीयौं से भरदी
माँ को मुझसे छीन कर मेरी ज़िन्दगी अधूरी करदी
माँ के बिना ज़िन्दगी हे खली खाली खाली
माँ ही जीवन में फेलाती हे खुशहाली
माँ और बेटी का रिश्ता होता हे सबसे ख़ूबसूरत
बिन माँ के, जैसे- मछली बिन पानी के, फूल बिना खुसबू, कोयल बिना मिठासऐसे संसार बन जाता हे बतसुरत
काश में भी माँ के आँचल की लेहर का हिस्सा बन पाती
आज में भी माँ की लाडली बेटी कहेलाती
माँ के अक्स,ममता,प्यार,दुलार, कुछ भी न मिला मुझे
माँ,बाप के न होने पर मनूस लोग कहेते हैं मुझे
सही में लोग खुशनसीब हैं वो जिनके पास हे माँ
कितने बध्नासिब हे मुझ जैसे जिनके पास न होती माँ




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